तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने ‘देवजी’ नामक व्यक्ति को माओवादी नेता नियुक्त किए जाने की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है। यह उच्च पद पर नियुक्ति का मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि यह संगठन की भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ों (Encounters) में भारी नुकसान झेलने के बाद, माओवादी पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के भीतर अस्थायी रूप से हथियार डालने (Laying down arms temporarily) के बारे में चर्चा शुरू हो गई है। यह आंतरिक चर्चा दर्शाती है कि सुरक्षा बलों के कड़े अभियानों ने संगठन पर गहरा दबाव डाला है। वरिष्ठ नेताओं के समर्पण और लगातार झटके लगने के कारण संगठन के भीतर वैचारिक मतभेद (Ideological Rifts) भी उभर रहे हैं। डीजीपी का देवजी की नियुक्ति को पुष्टि न करना माओवादी पदानुक्रम (Hierarchy) में गहरे संकट और नेतृत्व की कमजोर होती पकड़ का संकेत देता है।
तेलंगाना पुलिस ने माओवादी कैडरों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है और पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए सरकारी लाभ देने का आश्वासन दिया है। सुरक्षा बल किसी भी प्रकार की शांति वार्ता के प्रस्ताव की सत्यता की बारीकी से जाँच कर रहे हैं।


