2883 करोड़ का शराब घोटाला केवल आर्थिक अपराध नहीं है। यह पूरे सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है। नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन तक गड़बड़ियां सामने आई हैं। संगठित सिंडिकेट ने वर्षों तक फायदा उठाया। आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
ईडी की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि भ्रष्टाचार गहराई तक फैला था। झारखंड और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों का नाम जुड़ा। इससे अंतरराज्यीय नेटवर्क की पुष्टि हुई। यह मामला भविष्य में कई बड़े खुलासों की ओर इशारा करता है।
अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर है। लोग चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले। जांच की पारदर्शिता पर भरोसा बना रहे। यह घोटाला प्रशासन के लिए चेतावनी है। समय रहते सुधार जरूरी है।


