रामगढ़ जिले में रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा था। सुबह से ही मंदिरों और अखाड़ों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही थी। लोगों ने भक्ति गीतों और पूजा-अर्चना के साथ दिन की शुरुआत की। विभिन्न समितियों ने आकर्षक पंडाल बनाए थे। युवाओं ने शोभायात्रा की तैयारी पूरी कर ली थी। बाजारों में धार्मिक झंडे और सजावटी सामान की बिक्री बढ़ी हुई थी। हर ओर उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा था। परिवारों के साथ लोग पूजा में शामिल हुए। बच्चों और युवाओं में खास उत्साह देखा गया। पूरा जिला धार्मिक रंग में रंगा नजर आया।
दोपहर बाद अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी के साथ बारिश शुरू होते ही अफरा-तफरी मच गई। कई जगहों पर पंडाल हवा से गिर गए। सजावट और लाइटिंग व्यवस्था क्षतिग्रस्त हो गई। कार्यक्रमों को तुरंत रोकना पड़ा। लोगों को बारिश से बचने के लिए भागना पड़ा। बिजली गुल होने से अंधेरा छा गया। ध्वनि प्रणाली बंद हो गई जिससे आयोजन प्रभावित हुए। आयोजकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। मौसम के कारण योजना अनुसार कार्यक्रम नहीं हो सके।
हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था बनी रही। कई स्थानों पर छोटे स्तर पर पूजा जारी रखी गई। समितियों ने मिलकर नुकसान की भरपाई की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने सहयोग कर व्यवस्था संभाली। प्रशासन ने स्थिति का जायजा लिया। मौसम शांत होने के बाद कुछ कार्यक्रम फिर शुरू हुए। लोगों ने धैर्य और संयम का परिचय दिया। कठिनाइयों के बावजूद पर्व मनाया गया। रामनवमी का उत्साह अंत तक कायम रहा। श्रद्धा और एकता का संदेश पूरे जिले में देखने को मिला।



